मेरी दसवीं कक्षा तक का सफर LOVE STORY यह मेरी जिंदगी पर आधारित सच्ची घटना है | My journey up to class 10 class

 

मेरी दसवीं कक्षा तक का सफर यह मेरी जिंदगी पर आधारित सच्ची घटना है | My journey up to class 10 is a true event based on my life

मेरी दसवीं कक्षा तक का सफर यह मेरी जिंदगी पर आधारित सच्ची घटना है

First class reading book student



नमस्कार मेरा नाम MONU है और यह जो कहानी आप पढ़ रहे हैं यह मेरी जिंदगी पर आधारित कहानी है यह ब्लॉग हम सप्ताह में दो बार पब्लिश करते हैं जिसमें हम जिंदगी और जिंदगी से जुड़े अन्य किस्सों के बारे में जानते हैं यह किस्स से सच्चाई पर आधारित होते हैं और हम इन्हें बताने में अत्यंत प्रशंसा महसूस करते हैं क्योंकि अपने स्वयं के साथ JO घटनाएं घटित होते हैं उन घटनाओं के बारे में बताना अत्यंत ही रोचक होता है चलिए जानते हैं मेरी दसवीं कक्षा तक का सफर और क्या मैं एक कामयाब इंसान बना क्या मेरी दसवीं कक्षा पास हो गई इन्हीं सब सवालों के जवाब मैं आपको इस ब्लॉग के जरिए बताने जा रहा हूं जिस कहानी का शीर्षक है मेरी दसवीं कक्षा | My journey up to class 10 is a true event based on my life

दसवीं कक्षा जो जिंदगी के उस पड़ाव में आपको लेकर चली जाती है जहां पर आप अपनी जिंदगी के नहीं सर बात कर सकते हैं यह वही कक्षा होती है जहां पर आप की उम्र 15 से 16 साल की होती है यह उम्र लाजमी है कि प्यार मोहब्बत की होती है इसमें आपको शारीरिक खिंचाव महसूस होते हैं हालांकि मेरा जीवन साधा है परंतु मेरे जीवन में भी बहुत सी ऐसी घटनाएं हुई जो मुझे जुंजूर कर रख देती हैं जो प्रत्येक विद्यार्थी के जीवन में कभी ना कभी किसी ना किसी समय जरूर होती है

Student reading book in class room

Student reading book in class room

चलिए मेरे प्यारे पाठको अगर आप एक लड़का है तो इस कहानी को अपने तरीके से देखें और अगर आप एक लड़की हैं तो भी इसको अपनी जिंदगी से जुड़ने का अनुभव महसूस कीजिए क्योंकि यह कहानी नहीं बल्कि आपके जीवन का एक सच्चाई अनुभव करवाएगा हमारे समय में एलकेजी यूकेजी जैसी कोई क्लासेस होती ही नहीं थी जो आज के समय में चाइल्ड केयर या अन्य नाम से स्कूल को ले जाते हैं वह हमारे समय में नहीं होते थे हमारा जीवन चाहता था क्योंकि हमें गांव के रहने वाले हैं यह हमारे जीवन पर आधारित है तो मैं आपको बता देंगे की हम तीन भाई हैं और जिस कहानी को आप पढ़ रहे हैं उसका जो राइटर है जो कि मैं हूं सबसे छोटा हूं हालांकि हम फिर से उसी टॉपिक पर आते हैं कि मैं पहली कक्षा

पहली कक्षा पहला नया अनुभव मुझे पता नहीं क्या है कौन है क्यों है परंतु वहीं पर मेरा एक दोस्त जिसका नाम संदीप था और उसका भी एक दोस्त जिसका नाम भी संदीप था यानी कि दो मेरे दोस्त थे जिनका नाम संदीप था और हम तीनों पहली कक्षा में बिल्कुल साथ थे हालांकि हमारा यह साथ छठी कक्षा तक साथ ही रहा परंतु उसके बीच में काफी उतार-चढ़ाव है और हम अलग हो गए उसी के बीच हमने अलग-अलग समस्याओं का सामना करना पड़ा




”जैसा कि हमारी राइटर में पहले ही बता चुका है कि यह कहानी उसके जीवन पर आधारित है तो चलिए हम आगे जानते हैं,,

समय चला जाता है 2005 में जहां पर मैंने पहली कक्षा में अपना नाम लिखवाया परंतु यह कोई मुश्किल का कार्य ही नहीं था हमने अपने जीवन में बहुत सी समस्याओं का सामना करना पड़ा परंतु कुछ समस्या नहीं है अभी भी हमारे सामने आती हैं जो आप के जीवन से जुड़ी हुई है जैसे हमारे एक टीचर जो कि पॉलिटिकल साइंस के थे जिनका नाम ओमप्रकाश था वह हमेशा कहते थे बड़ी मछली छोटी मछली को हमेशा खाती हैं इसके मध्य में आपको कुछ समरी को छोटा करके यह संक्षिप्त रूप में समझाने का प्रयास करूंगा क्योंकि यह कहानी काफी लंबी है ब्लॉक के तौर पर अगर हम इसे जाने तो हमारी साइट sarkariresultalljob.com इतना जगह नहीं देती है कि हम अपने जीवन की सभी घटनाओं को इस में विस्तृत रूप से दे सके

हम तीनों मित्र एक सामान्य जिंदगी जी रहे थे और हमारे सामने कोई भी ऐसी समस्याएं नहीं आई तो की अन्य बच्चों के सामने आती है हमने बचपन में देखा कि बच्चे स्कूल की दीवारों को लांग करके वहां से चले जाते हैं जिन्हें हम हाफ टाइम का समय कहते हैं उसमें हमने कभी भी बसता उठाकर भागने की कोशिश नहीं की क्योंकि हमें अपने टीचरों से बहुत ज्यादा डर लगता है जो की सामान्य रूप से हर एक बच्चे को लगता है

इसीलिए डर के साथ साथ हम चौथी कक्षा में हो गई समस्या तो तब हमारे सामने आने लगी जब हमें हिंदी तक नहीं आती थी आज मुझे उस जानकारी को देते हुए 4 ज्यादा करो होता है कि मैं पांचवी कक्षा में मेरे प्यारे मित्र अनमोल की वजह से हिंदी की परिवेश पुस्तक पढ़ने में सफल हुआ और अपनी एक मैडम जी ने हम रेवती मैडम कहते हैं उसके सामने पूरी क्लास के सामने मैंने उसको पढ़ करके सुनाया उसी समय मुझमें कॉन्फिडेंस आ गया था

10th class real story

इसी के साथ साथ मेरी सफलता का एक और मेरे भाई को भी जाता है इसका नाम योगेश है हालांकि उसने मुझे अपने नाम की स्पेलिंग से लेकर के पहली कक्षा की पुस्तक जिसे हम कायदा कहते हैं उसे पढ़ना सिखाएं का का की की और कखगघड सिखाने के बाद मुझे धीमी धीमी हिंदी का अवतरित ज्ञान होने लगा हालांकि हम सरकारी स्कूल में पढ़ते थे परंतु हमारे माता-पिता हमें प्राइवेट स्कूल में पढ़ाना चाहते थे हमारे जीवन साकार होते होते रह गया क्योंकि जब भी हमारा जी एक ट्यूशन को करने लगा और जहां पर हमारी बहुत ज्यादा पिटाई हुई खास करके मेरी उस समय से हमें बहुत ज्यादा डर लगा और मांग कभी भी प्राइवेट स्कूल में नहीं गए

 

जीवन आपको हर समय कुछ न कुछ सिखाता है हमने भी यह सीखा और पाया कि कामयाबी को प्राप्त करने के लिए आपको कुछ ना कुछ जरूर होना पड़ता है जिन बच्चों ने अपना बचपन खो दिया वह आप सफल हो रहे हैं और जिन्होंने अपना बचपन खुलकर के जिया वह भी सफल है परंतु फर्क इतना है कि कुछ समय ज्यादा लगा अगर आप पेरेंट है तो अपने बच्चों को बचपन जीने दीजिए



अब हम अपने गांव के स्कूल से जो की पांचवीं कक्षा तक था वहां से पास हो करके निकल गए पास होना तो कहना गलत होगा क्योंकि आठवीं कक्षा तक कोई भी फेल नहीं करता इसी के चलते हम अगली अगली कक्षा में चले गए

छठी कक्षा से आठवीं कक्षा तक का सफर

छठी कक्षा में हमें लगा कि हम बहुत जल्दी से स्कूल में आ गए हैं क्योंकि छठी कक्षा से आठवीं कक्षा तक मुझे पता ही नहीं चला कि कब 2 साल निकल गए और अब मैं नवमी कक्षा में हो गया हूं इसी के साथ-साथ मैंने अपने एक प्यारे मित्र को खो दिया जिसका नाम संदीप था हालांकि कहानी में मैंने अपने दो मित्रों का नाम संदीप बताया था परंतु जो मित्र मेरा अच्छा मित्र था वही एक प्राइवेट स्कूल में चला गया था और मैं अभी भी सरकारी स्कूल में ही था

यह जानकारी में बताते हुए बहुत ही गौरवान्वित होता हूं कि मेरी संस्कृत बहुत अच्छी थी जो कि छठी कक्षा से ही अच्छी चल रही थी यहां पर मेरा एक मित्र जो कि जिसका नाम दीपक है वह भी बना और मैंने और मैंने और दीपक ने 26 जनवरी 15 अगस्त में भाग लिया जहां पर हम ने देशभक्ति गीत गाए हालांकि तब तक मेरा एक अच्छा मित्र दीपक बन चुका था और मैं अपनी जिंदगी से संदीप को भूल गया था

अब हमारा समय लगातार बढ़ता ही जा रहा था और मैंने कुछ समय बाद दीपक को भी खो दिया दीपक भी एक प्राइवेट स्कूल में चला गया परंतु एक दोस्त जिसका नाम संदीप था वह अभी भी मेरे साथ ही था और हम सभी नौवीं कक्षा में हो गए नौवीं कक्षा सामान्य रूप से ऐसी होती है जिसे हमें स्कूल स्तर पर पास करना होता है परंतु हमारी किस्मत अच्छी थी और हमलों में कक्षा में भी पास हो कर के दसवीं कक्षा में आ गया

यह भाई दसवीं कक्षा है जहां पर लोगों की जिंदगी बदल जाती है क्योंकि दसवीं कक्षा बोर्ड की कक्षा मानी जाती है और इसका एग्जाम भी मुश्किल होता है जैसे तैसे करके हमने पहले सेमेस्टर के पेपर दिए हालांकि इस समय हमारे साइंस के टीचर अश्वनी सर का भी आगमन हुआ जोकि बहुत अच्छी तरीके से पढ़ाते थे यहीं पर हमारी मैथ की मैडम जिसका नाम नीलम था वह अत्यंत खूबसूरत थी और हमें अच्छी भी लगती थी उसी के साथ हमारी हिंदी के टीचर रामफल सार थे और हमारी इंग्लिश की मैडम जिसका नाम हमने ताई रख रखा था हालांकि मेरी मैडम का नाम याद नहीं आ रहा है कुल मिला करके हमारा जीवन सही चल रहा था इसी के बीच हमारा रिजल्ट आ गया

और मैं दो विषय में फेल हो गया जो इस प्रकार थी इंग्लिश और मैथ जी हां वही विषय जिससे बच्चे खासतौर पर डर जाते हैं और इसी डर के साथ साथ मैंने कोचिंग पर जाना शुरू कर दिया परंतु यह कोचिंग और भी ज्यादा खतरनाक साबित होगी यहां पर हमें स्कूल के साथ-साथ कोच का भंय भी रहने लगा और हमने दोबारा से इंग्लिश और गणित के पेपर दीया हालांकि यह भी पर हमारे स्कूल में सेंटर होने के कारण हमने नकल के जरिए जैसे तैसे पास कर लिया

हालांकि मैं यह बता देना चाहूंगा कि हमारे समय में 2 सेमेस्टर होते थे जो कि 6 महीने के उपरांत पेपर करवाए जाते थे अभी के समय में यह है शिक्षा प्रणाली बदल दी गई है और 1 साल में एक ही बार पेपर लिए जाते हैं 10 वीं कक्षाऔर 12वीं के जब आप इसे पढ़ रहे होंगे तो मैं नहीं जानता कि आप किस कक्षा में और कब इसे पढ़ रहे हैं परंतु मैं आपको बता देना चाहूंगा कि 2015 की शिक्षा प्रणाली की जरिए हमने पेपर दिए थे जब भी आप इसे पढ़ रहे होंगे तब के समय का अनुमान लगा सकते हैं चलिए हम कहानी पर वापस आते हैं




अब मैंने इंग्लिश और मैथ्स का पेपर तो दे ही दिया साथ ही साथ दूसरे सेमेस्टर की भी पेपर दे दिए और मेरी किस्मत मानिए इस बार मैं पिछले सेमेस्टर में पास हो गया और जिसमें मुझे पासिंग मार्क्स भी नहीं मिल रही थी उसमें मुझे सबसे ज्यादा मार्क्स मिले ज्ञानी की गणित और इंग्लिश में परंतु दूसरे सेमेस्टर मैं मेरे पॉलिटिकल साइंस में मैं फेल हो गया परंतु मेरा स्कूल देख सरकारी स्कूल था और जिसका सिस्टम इस प्रकार था कि जिस बच्चे की 2 सब्जेक्ट में फेल हो गया है वह 11वीं कक्षा तक है 1 साल अपनी तैयारी कर सकता है और दसवीं कक्षा की एक विषय की तैयारी करके दसवीं कक्षा में पास हो सकता है जैसा कि मैंने पहले भी बताया है कि नवमी और ग्यारहवीं कक्षा स्कूल बेस पर पास करनी होती है तो यह हमारे लिए कोई ज्यादा बड़ा कार्य नहीं था परंतु इसमें मैंने अपनी एक दूसरे दोस्त जिसका नाम संदीप था उसको खो दिया 6 महीने बाद जब मैंने पॉलिटिकल साइंस का पेपर दिया था मैं तो पास हो गया परंतु संदीप पास नहीं हो सका इसी के साथ-साथ बहुत सी मेरे ऐसे दोस्त जो मुझसे बिछड़ गई सिर्फ 10 वीं कक्षा के चलते

कुछ मेरे दोस्तों ने प्राइवेट स्कूलों से दसवीं कक्षा करने का निर्णय किया और कुछ में पढ़ाई छोड़ दी परंतु मेरी किस्मत और मेरी शिक्षा दोनों ने साथ दिया और मैं 10 वीं कक्षा में पास हो गया हालांकि मेरे ज्यादा अंक प्राप्त नहीं हुए परंतु मेरे इतने अंक जरूर आ गए कि मैं कोई भी एग्जाम जो दसवीं कक्षा पर निकलता है उसे पढ़ सकता हूं और मुझे जिंदगी में पीछे मुड़कर देखने का कोई भी जरिया नहीं मिलता इसलिए मैंने इस कहानी के रूप में अपने पिछले जीवन को याद किया है हालांकि अगर इस तरीके के आप लोग पढ़ना चाहते हैं तो हमारी वेबसाइट पर लगातार विजिट करते रहिए और सप्ताह में एक बार जरूर हमारे ब्लॉक को पड़ी है

हम यह स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि इस कहानी में बताए गए पत्र नाम स्थान इत्यादि काल्पनिक है परंतु घटनाएं सच्ची हैं अगर हम एक उदाहरण के रूप में मान्यता जैसी मेरे दो दोस्तों के नाम संदीप है तो यहां पर असलियत में हमारे उन दोस्तों के नाम सुनील है इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि कैसे मैंने इन पात्रों को आगे पीछे बदल दिया है जिससे किसी भी मेरे मित्र को कोई समस्या न आए

हालांकि आप हमारी इस कहानी से अपने आप को भी जोड़ सकते हैं क्योंकि हमारे अंदर बहुत सी कमियां होती हैं परंतु हम संघर्ष के साथ डट कर के मुकाबला करते हैं और सफलता हासिल कर लेते हैं यह समस्या प्रत्येक स्टूडेंट के सामने आती है परंतु आप कभी भी घबराए नहीं क्योंकि जिंदगी चलती रहेगी जैसे कि मैंने अपने दोनों सेमेस्टर में फेल होने के बावजूद भी मैंने दसवीं कक्षा पास करने का संकल्प लिया और मैं पास भी हो गया उसी तरीके से मेरे दोस्त संदीप ने हार मानने का निर्णय लिया और आज भी वह दसवीं कक्षा पास नहीं कर पाया कुछ मेरे मित्र जो प्राइवेट स्कूल में गए मुझे कहते हुए गर्व हो रहा है कि उनका निर्णय सही था



और उन्होंने प्राइवेट स्कूल के जरिए दसवीं कक्षा उत्तीर्ण कर ली साथ ही साथ कुछ मेरे मित्र शिक्षा के क्षेत्र में मेरे साथ भी आ गए चाहे वह एक दो साल के फैसले से ही क्यों ना हो परंतु मुझे आज भी खुशी है कि वह मेरे साथ है आपकी जिंदगी भी इस कहानी से मिलते जुलते पात्रों के साथ घटनाएं घटित होती हुई होंगी और आपका जीवन भी मेरी तरह ही रहा होगा कृपया नीचे जाकर के कमेंट बॉक्स में अपनी कहानी लिख डालिए

यह मत सोचिए कि मैं पढ़ लूंगा या नहीं क्योंकि मेरे जैसे बहुत ज्यादा लोग आप की कहानी पढ़ना चाहते हैं हमने एक सिर्फ प्लेटफार्म आपको दिया है जिस बॉक्स का नाम है कॉमेंट अपनी सच्ची कहानी जरूर लिखें ताकि हम जब आपकी कहानी पढ़ी तो हमें भी विश्वास होगी हमारी जिंदगी जैसी बहुत से मेरे पाठक मित्रों की भी जिंदगी रही होगी आप की कहानी आने वाले समय में प्रकाशित की जाएगी वहां पर अगर आप अपना असली नाम देना चाहती हैं तो हमें कृपया कहानी के अंत में जरूर बताएं अगर आप अपनी पहचान गुप्त रखना चाहते हैं तो भी हमें जरूर बताएं और साथ ही साथ जो कहानियां लिखी उसी अपने जीवन पर आधारित होने वाली घटनाओं के आधार पर ही लिखें

आपका इस वेबसाइट पर आने के लिए तहे दिल से धन्यवाद हम आशा करेंगे कि आप कुशल मंगल होंगे और आपकी फैमिली कुशल होगी अगर हमारे राइटर द्वारा लिखे गए कांटेक्ट में कोई गलती पाई जाती है तो हमें माफी दे क्योंकि इंसान गलतियों का पुतला होता है और हम भी एक इंसान है

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